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Tuesday, May 17, 2011

शायद पुरुष महिलाओं से आगे नहीं निकल सकते!


भई आज के समय में महिलाओं-पुरूषों में आगे निकलने की दौड़ में महिलाओं ने मेरे हिसाब से पुरूषों को इतना पीछे छोड़ दिया है कि यदि वो गाड़ी में बैठकर भी दौड़ें तो भी शायद महिलाओं से आगे नहीं निकल सकते।
बात हरियाणा की जोकि एक कृषि प्रधान प्रदेश है उससे करें तो पता चलता है कि यहां पर पुरुषों से ज्यादा महिलाएं आपको खेतों में काम करती हुई नजर आएगीं। ६-७ महिलाओं के बीच में मात्र एक ही पुरुष कार्य करता हुआ मिलेगा या फिर किसी खेत के कौन में पेड़ की छांव में बैठकर हुक्का चल रहा होगा या फिर बीड़ी के कस लगाए जा रहे होंगे।
हाल ही में हुई जनगणना से यह पता चला है कि हरियाणा में पुरूषों से अधिक महिलाओं ने बाजी मारी है और केवल खेती ही नहीं बल्कि लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे पाया गया है। खेल, खेती, नौकरी, दिहाड़ी आदि सभी क्षेत्रों में हरियाणा की महिलाओं ने अपना नाम कमाया है।
इसी वर्ष संपन्न हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान हर खेल में हरियाणा की छौरियों ने अपने नाम का लोहा मनवाया। दौड़, कूद, बैडमिंटन जैसे खेलों में उन्होंने भारतमाता के चरणों में पदमों का ढ़ेर लगा दिया।
हरियाणा से बाहर चलें तो पहले जम्म-कश्मीर से ही ले लेते हैं, जहां पर कुंजेर में आशा जी पहली कश्मीरी पंडित महिला हैं जो मुस्लिम बहुल और उग्रवाद प्रभावित कश्मीर घाटी में पंच चुनी गई हैं। उन्होंने मुस्लिम महिला प्रतिद्वंद्वी सर्वा बेगम को हराकर यह चुनाव जीता।
गौरतलब है कि कश्मीर में अल्पसंख्यक माने जाने वाले पंडित समुदाय के लोग 1989-90 में उभरी भारत विरोधी हिंसा के दौरान भारी संख्या में कश्मीर छोडऩे को मजबूर हो गए थे। लेकिन आशा का परिवार गांव के उन चार परिवारों में है जो अपनी पुरखों की जमीन छोडऩे को तैयार नहीं हुए।
श्रीनगर-गुलमर्ग रोड पर स्थित कुंजेर ब्लॉक के वुसन गांव में आशा जी का मुकाबला सरवा बेगम से था। इस सीधे मुकाबले में आशा जी को 55 वोट मिले जबकि सरवा बेगम को 42 वोट। आशा जी ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया है जोकि भारतीय महिलाओं के लिए जोश पैदा करने वाला है।
गत दिनों पांच राज्यों में हुए चुनाव में भी लगभग महिलाओं ने अपना एक छत्र शासन पक्का कर दिया है। जिससे अब कहावत बन चुकी है कि केंद्र में मैडम जी, दक्षिण में अम्मा, पूर्व में दीदी, उत्तर में बहन जी, राजधानी में आंटी, घर में पत्नी, घर से बाहर वर्किंग लेडी, का आज के समय में एकछत्र राज स्थापित हो चुका है। समाज को आज महिलाओं ने सामाजिक कुरितियों और पूरानी गली-सड़ी धारणाओं को तोड़कर उन्हें ठेंगा दिखाने का काम किया है।

कभी भी हो सकता है भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध?

सैन्य सरगर्मियों को देखकर ऐसा लगता है कि दोनों देश युद्ध की तैयारी में जुटे हैं। दोनों देशों के नेताओं और सैन्न अधिकारियों के बयान भी युद्ध भड़काने वाले हैं।
आईएसआई चीफ शुजा पाशा के भारत पर हमले की तैयारियों की धमकी के एक दिन बाद सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से बैठक की। लादेन की मौत के बाद गिलानी ने पहली बार सेना प्रमुखों के साथ बैठक की। इसमें भारत के साथ युद्ध होने पर हमले और बचाव के मुद्दे पर तमाम बातें हुईं। इधर, भारत ने युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। पाकिस्तान सीमा के पास उत्तरी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में भारत ने थलसेना और वायुसेना के तालमेल से एक वृहद अभ्यास किया है। कहने को यह थलसेना का नियमित सालाना अभ्यास है, लेकिन मौजूदा माहौल में इस सैन्य अभ्यास का विशेष रणनीतिक महत्व है।
इतना ही नहीं कई कट्टरपंथी संगठन भी भारत के खिलाफ युद्ध या कहें आतंकी दहशत फैलाने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को ही जमात-उद-दावा ने भी रैली की। जमात के प्रमुख और मुंबई में हुए 26/11 हमले का मुख्य आरोपी हाफिज सईद ने एक बड़ी रैली कर भारत के खिलाफ जहर उगला। हाफिज सईद ने कहा कि भारत या अमेरिका ने फिर ऐबटाबाद जैसी कार्रवाई की, तो इन देशों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया जाएगा।
लादेन की मौत के बाद लगता है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान युद्ध की तैयारी कर रहा है। लादेन की मौत के बाद पहली बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गिलानी ने सेना के तीनों अंगों के प्रमुख के साथ बैठक की। सुत्रों के मुताबिक, बैठक में सबसे ज्यादा आईएसआई चीफ शुजा पाशा के बयान पर चर्चा की गई। पाशा ने रविवार को कहा था कि भारत के खिलाफ हमले की तैयारी पूरी है और सारी योजना बना ली गई है।
हालांकि, सोमवार की शाम ही भारत ने पाशा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई। भारत सरकार ने पाशा के इस बयान पर हैरत जताई। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ के सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने पूछा कि आखिर शुजा पाशा ऐसा बयान देने वाले होते कौन हैं।
गौरतलब है कि भारत के सेना प्रमुख जनरल वी.के. सिंह ने हाल ही में कहा था कि भारत भी सीमा पार मौजूद आतंकवादियों की पनाहगाहों को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका सरीखे ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है।
अल कायदा सरगना लादेन के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान घबरा गया है। इसका कारण है कि उसे यह डर सता रहा है कि भारत भी इस तरह की कार्रवाई कर सकता है। गौरतलब है कि भारत में कत्लेआम मचाने वाले कई आतंकी अब भी पाकिस्तानी सरजमीं पर मौजूद हैं। इसीकरण पाकिस्तान गिदड़ भभकी देकर भारत को इस तरह के कार्रवाई करने से रोक रहा है।
पाकिस्तान अपनी ताकत जानता है। फिर भी लगातार भारत को धमकी दे रहा है। कहीं इसके पीछे मेरिका तो नहीं? विदेश मामलों के कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि हो सकता है लादेन की सूचना देने में पाकिस्तान का भी हाथ हो। वह कार्रवाई में भाग नहीं लिया हो, लेकिन लादेन को मरवाने में उसका हाथ जरूर रहा होगा। ऐसा संभव है कि लादेन के बदले पाकिस्तान ने अमेरिका से गुप्त समझौता कर लिया हो और कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी मिल गया हो। मौका परस्त पाकिस्तान ऐसा कर भी सकता है। अब लादेन पाकिस्तान के लिए किसी काम का नहीं रह गया था। वह उसे अमेरिका को सौंप कर कश्मीर मामले पर अमेरिकी सहयोग हासिल कर लिया हो। इन सब परिस्थितियों में भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।

राइट टु इन्फॉर्मेशन ऐक्ट (आरटीआई)


RTI-Act2005 में आम नागरिकों को ऐसा हथियार मिला, जिसकी हमें काफी जरूरत थी। राइट टु इन्फॉर्मेशन ऐक्ट(Right to information Act) के लागू हो जाने से आम जनता को हर वो चीज जानने का अधिकार मिल गया है, जिसका संबंध उसकी जिंदगी से है। सरकारी विभागों से करप्शन का सफाया करने का भी यह अचूक हथियार है। हालांकि लोग अब भी इसके इस्तेमाल और अहमियत के बारे में ज्यादा नहीं जानते। आरटीआई(RTI) से जुड़े हर पहलू की जानकारी दे रहे हैं आदित्य मित्र
'सूचना का अधिकार' अधिनियम 2005 भारतीय नागरिकों को संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडल के सदस्यों के बराबर सूचना का अधिकार देता है। इस अधिनियम के अनुसार, ऐसी इन्फर्मेशन जिसे संसद या विधानमंडल सदस्यों को देने से इनकार नहीं किया जा सकता, उसे किसी आम व्यक्ति को देने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए अब अगर आपके स्कूल के टीचर हमेशा गैर-हाजिर रहते हों, आपके आसपास की सड़कें खराब हालत में हों, सरकारी अस्पतालों में मशीन खराब होने के नाम पर जांच न हो, हेल्थ सेंटरों में डॉक्टर या दवाइयां न हों, अधिकारी काम के नाम पर रिश्वत मांगें या फिर राशन की दुकान पर राशन ही न मिले तो आप सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत ऐसी सूचनाएं पा सकते हैं। यह अधिकार आपको और ताकतवर बनाता है।

क्या है आरटीआई(RTI)
सरकारी कार्यप्रणाली में खुलापन और पारदर्शिता लाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लाया गया है। यह लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत बनाने, करप्शन हटाने, जनता को अधिकारों से लैस बनाने और देश के विकास में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुआ है।

जानें आरटीआई के तहत अपने अधिकार
हर पब्लिक अथॉरिटी में एक या अधिक अधिकारियों को जन सूचना अधिकारी के रूप में अपॉइंट करना जरूरी है। आम नागरिकों द्वारा मांगी गई सूचना को समय पर उपलब्ध कराना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
इस अधिनियम में राइट टु इन्फर्मेशन सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिला है। इसमें निगम, यूनियन, कंपनी वगैरह को सूचना देने का प्रावधान नहीं है, क्योंकि ये नागरिकों की परिभाषा में नहीं आते।
अगर किसी निगम, यूनियन, कंपनी या एनजीओ का कर्मचारी या अधिकारी आरटीआई दाखिल करता है तो उसे सूचना दी जाएगी, बशर्ते उसने सूचना अपने नाम से मांगी हो, निगम या यूनियन के नाम पर नहीं।
जनता को किसी पब्लिक अथॉरिटी से ऐसी इन्फर्मेशन मांगने का अधिकार है जो उस अथॉरिटी के पास उपलब्ध है या उसके नियंत्रण में है। इस अधिकार में उस अथॉरिटी के पास या नियंत्रण में मौजूद कृति, दस्तावेज या रेकॉर्ड, रेकॉर्डों या दस्तावेजों के नोट्स, प्रमाणित कॉपी और दस्तावेजों के सर्टिफाइड नमूने लेना शामिल है।
नागरिकों को डिस्क, फ्लॉपी, टेप, विडियो कैसेट या किसी और इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंटआउट के रूप में सूचना मांगने का अधिकार है। शर्त यह है कि मांगी गई सूचना उसमें पहले से मौजूद हो।
आवेदक को सूचना आम तौर पर उसी रूप में मिलनी चाहिए जिसमें वह मांगता है। अगर कोई विशेष सूचना दिए जाने से पब्लिक अथॉरिटी के संसाधनों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका हो या इससे रेकॉर्डों के परीक्षण में किसी नुकसान की आशंका होती है तो सूचना देने से मना किया जा सकता है।
अक्सर यह देखने में आता है कि तमाम सरकारी विभागों से जनता को प्राय: ढेरों शिकायतें रहती हैं कि उनके लेटर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में आप अपनी शिकायत के कुछ समय बाद सूचना के अधिकार के तहत संबंधित विभाग से अपने लेटर पर हुई कार्रवाई की सिलसिलेवार जानकारी ले सकते हैं।
आप किसी भी पब्लिक अथॉरिटी जैसे केंद्र या राज्य सरकार के विभागों, पंचायती राज संस्थाओं, न्यायालयों, संसद, राज्य विधायिका और दूसरे संगठनों, गैरसरकारी संगठनों सहित ऐसे सभी विभाग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राज्य अथवा केंद्र सरकार द्वारा स्थापित संघटित, अधिकृत, नियंत्रित अथवा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित हैं, से जानकारियां मांग सकते हैं।
आप किसी प्राइवेट स्कूल, टेलिफोन कंपनी या बिजली कंपनी आदि से जुड़ी जानकारी पाने के लिए संबंधित विभाग से सूचना के अधिकार के तहत ऐप्लिकेशन दे सकते हैं।

कैसे भरें आरटीआई
सूचना पाने के लिए कोई तय प्रोफार्मा नहीं है। सादे कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप कराकर 10 रुपये की फिक्स्ड फीस के साथ अपनी ऐप्लिकेशन संबंधित अधिकारी के पास किसी भी रूप में (खुद या डाक द्वारा) जमा कर सकते हैं। किसी खास तरह से आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
आप हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी स्थानीय भाषा में ऐप्लिकेशन दे सकते हैं।
ऐप्लिकेशन फीस नकद, डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर से दी जा सकती है।
डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर संबंधित विभाग (पब्लिक अथॉरिटी) के अकाउंट ऑफिसर के नाम पर होना चाहिए।
डिमांड ड्राफ्ट के पीछे और पोस्टल ऑर्डर में दी गई जगह पर अपना नाम और पता जरूर लिखें।
आरटीआई ऐक्ट जम्मू और कश्मीर के अलावा पूरे देश में लागू है।
अगर आप फीस नकद जमा कर रहे हैं तो रसीद जरूर ले लें।
गरीबी रेखा के नीचे की कैटिगरी में आने वाले ऐप्लिकेंट को किसी भी तरह की फीस देने की जरूरत नहीं है। इसके लिए उसे अपना बीपीएल सर्टिफिकेट दिखाना होगा।
सिर्फ जन सूचना अधिकारी को ऐप्लिकेशन भेजते समय ही फीस देनी होती है। पहली अपील या सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिश्नर को दूसरी अपील के लिए किसी प्रकार की फीस नहीं देनी होती।
अगर सूचना अधिकारी आपको समय पर सूचना उपलब्ध नहीं करा पाता है और आपसे तीन दिन की समयसीमा गुजरने के बाद डॉक्युमेंट उपलब्ध कराने के नाम पर अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के लिए कहता है तो यह गलत है। इस स्थिति में अधिकारी आपको मुफ्त डॉक्युमेंट उपलब्ध कराएगा। चाहे उनकी संख्या कितनी भी हो।
एप्लिकेंट को सूचना मांगने के लिए कोई वजह या पर्सनल ब्यौरा देने की जरूरत नहीं है। उसे सिर्फ अपना पता देना होगा।

पोस्टल डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए 629 पोस्ट ऑफिसों को सहायक जन सूचना कार्यालय बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि आप इनमें से किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर इनके आरटीआई काउंटर पर फीस और ऐप्लिकेशन जमा कर सकते हैं। वे आपको रसीद और अकनॉलेजमेंट (पावती पत्र) देंगे। यह पोस्ट ऑफिस की जिम्मेदारी है कि वह आपकी ऐप्लिकेशन संबंधित सूचना अधिकारी तक पहुंचाए।

इन बातों का रखें ध्यान
आप जब भी आरटीआई के तहत जानकारी मांगें तो हमेशा संभावित जवाबों को ध्यान में रखकर अपने सवाल तैयार करें। आपका जोर ज्यादा से ज्यादा सूचना प्राप्त करने पर होना चाहिए।
अगर अपने आवेदन में कुछ दस्तावेजों की मांग कर रहे हैं तो संभावित शुल्क पहले ही ऐप्लिकेशन शुल्क के साथ जमा कर दें। जैसे आपने चार से पांच डॉक्युमेंट मांगे हैं तो आप 10 रुपये के बजाय 20 रुपये का पोस्टल ऑर्डर, ड्राफ्ट या नकद जमा कर सकते हैं। ऐसे में सूचना अधिकारी द्वारा आपसे अतिरिक्त धनराशि मांगने और आपके द्वारा उसे जमा किए जाने में बीत रहे समय को बचाया जा सकता है।
पोस्टल ऑर्डर में पूरी जानकारी भरकर ही संबंधित अधिकारी को भेजें। बिना नाम के पोस्टल ऑर्डर का गलत इस्तेमाल होने की संभावना के साथ-साथ जन सूचना अधिकारी द्वारा उसे लौटाया भी जा सकता है। पोस्टल ऑर्डर आप किसी भी पोस्ट ऑफिस से खरीद सकते हैं।

ऐप्लिकेशन देने के बाद
अगर आपने अपनी ऐप्लिकेशन जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) को दी है तो वह आपको 30 दिन के अंदर सूचना मुहैया कराएगा। साथ ही उसके जवाब में प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पता भी दिया जाना जरूरी है। अगर आपने अपनी ऐप्लिकेशन सहायक सूचना अधिकारी को दी है तो उसकी समयसीमा 35 दिन है।
ऐप्लिकेंट द्वारा मांगी गई सूचना का संबंध अगर किसी व्यक्ति की जिंदगी या आजादी से जुड़ा हो तो सूचना अधिकारी को ऐप्लिकेशन मिलने के 48 घंटों के अंदर इन्फर्मेशन देनी होगी।
जन सूचना अधिकारी द्वारा दस्तावेज (अतिरिक्त) मुहैया कराए जाने के लिए फीस की रसीद जारी करने और आवेदक द्वारा उस फीस को जमा कराने की अवधि को उन 30 दिन की अवधि में नहीं जोड़ा जाता है।

ऐप्लिकेशन लेने से इनकार
कुछ विशेष परिस्थितियों में ही जन सूचना अधिकारी आपकी ऐप्लिकेशन लेने से इनकार कर सकता है। वे इस तरह हैं :
अगर ऐप्लिकेशन किसी और जन सूचना अधिकारी या पब्लिक अथॉरिटी के नाम पर हो।
अगर आप ठीक तरह से सही फीस का भुगतान न कर पाए हों।
अगर आप गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के सदस्य के रूप में फीस से छूट मांग रहे हैं, लेकिन इससे जुड़ा सर्टिफिकेट नहीं दे सकते।

ऐसा भी होता है
अगर आपकी अपील पर संबंधित अधिकारी को सूचना आयोग द्वारा आर्थिक रूप से दंडित किया जाता है तो जुर्माने के रूप में उससे ली गई राशि सरकारी खजाने में जमा की जाती है। हालांकि धारा 19(8) (बी) के अंतर्गत आवेदक को किसी हानि या नुकसान के लिए मुआवजा दिया जा सकता है।
कुछ अधिकारी ऐप्लिकेंट को मीटिंग के लिए बुलाते हैं, यह कानून पब्लिक अथॉरिटीज को मीटिंग के लिए आवेदकों को बुलाने या यहां तक कि आवेदक को व्यक्तिगत रूप से आकर मांगी गई सूचना ले जाने पर जोर देने का अधिकार नहीं देता है।
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके द्वारा सूचना मांगे जाने से आपके जान-माल को खतरा हो सकता है तो आप सूचना दूसरे व्यक्ति के नाम पर मांग सकते हैं। जिसे आसानी से धमकाया नहीं जा सके या जो किसी दूर स्थान पर रहता हो।
जहां मांगी जा रही सूचना एक से अधिक व्यक्ति को प्रभावित करती हो, तो कभी-कभी अन्य लोगों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से सूचना मांगना बेहतर होता है, क्योंकि अधिक संख्या आपको बल और सुरक्षा देती है।
अगर ऐप्लिकेंट पढ़ा-लिखा नहीं है तो जन सूचना अधिकारी की यह जिम्मेदारी है कि वह उसकी रिक्वेस्ट को लिखित रूप में देने में सभी प्रकार से सहायता करें।
अगर ऐप्लिकेशन की विषयवस्तु किसी और पब्लिक अथॉरिटी से जुड़ी हो तो उस ऐप्लिकेशन को संबंधित पब्लिक अथॉरिटी को ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
अगर कोई आवेदक ऐसी सूचना मांगता है जो किसी तीसरी पार्टी से संबंध रखती है अथवा उसके द्वारा उपलब्ध कराई जाती है और तीसरी पार्टी ने ऐसी सूचना को गोपनीय माना है तो जन सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह सूचना को प्रकट करने अथवा न करने पर विचार करें।
थर्ड पार्टी में ऐसी प्राइवेट कंपनियां आती हैं, जो सरकार से मदद नहीं लेती हैं और जो सूचना के अधिकार कानून के दायरे में नहीं आती। ऐसी कंपनियों की जानकारी केवल सरकारी माध्यम से मांगी जा सकती है। लेकिन ये कंपनियां जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं हैं।

अपील का अधिकार
अगर किसी ऐप्लिकेंट को तय समयसीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है या वह दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं होता है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी के सामने अपील कर सकता है।
प्रथम अपील के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी। अपनी ऐप्लिकेशन के साथ जन सूचना अधिकारी के जवाब और अपनी पहली ऐप्लिकेशन के साथ-साथ दूसरे जरूरी दस्तावेज अटैच करना जरूरी है।
प्रथम अपीलीय अधिकारी रैंक में जन सूचना अधिकारी से बड़ा अधिकारी होता है। ऐसी अपील सूचना उपलब्ध कराए जाने की समयसीमा के खत्म होने या जन सूचना अधिकारी का फैसला मिलने की तारीख से 30 दिन के अंदर की जा सकती है।
अपीलीय अधिकारी को अपील मिलने के 30 दिन के अंदर या विशेष मामलों में 45 दिन के अंदर अपील का निपटान करना जरूरी है।

दूसरी अपील एसआईसी में
अगर आपको पहली अपील दाखिल करने के 45 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलता या आप उस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो आप 45 दिन की अवधि समाप्त होते ही 90 दिन के अंदर राज्य सरकार की पब्लिक अथॉरिटी के लिए उस राज्य के स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन से या केंद्रीय प्राधिकरण के लिए सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिशन के पास दूसरी अपील दाखिल कर सकते हैं।

अगर फिर भी न हों संतुष्ट
अगर प्रथम अपीलीय अधिकारी इस तय समयसीमा में कोई आदेश जारी नहीं करता या ऐप्लिकेंट प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश से संतुष्ट नहीं होता तो वह फैसला आने के 90 दिन के अंदर केंद्रीय सूचना आयोग के सामने सेकंड अपील दायर कर सकता है।
अगर आरटीआई को जन सूचना अधिकारी रिजेक्ट कर देता है, तो ऐप्लिकेंट को वह कुछ सूचनाएं जरूर देगा। ये हैं-रिजेक्शन की वजह, उस टाइम पीरियड की जानकारी जिसमें रिजेक्शन के खिलाफ अपील दायर की जा सके और उस अधिकारी का नाम व पता (ब्यौरा) जिसके यहां इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है।
सूचना का अधिकार ऐक्ट के तहत अपील पर फैसला करना एक अर्द्ध-न्यायिक काम है। इसलिए अपीलीय अधिकारी के लिए यह सुनिश्चित कराना जरूरी है कि सिर्फ न्याय हो ही नहीं, बल्कि वह होते हुए दिखाई भी दे। इसके लिए अपीलीय अधिकारी द्वारा पारित आदेश स्पीकिंग ऑर्डर होना चाहिए, जिसमें फैसले के पक्ष में तर्क भी दिए गए हों।

एक्स्ट्रा फीस
सूचना लेने के लिए आरटीआई ऐक्ट में ऐप्लिकेशन फीस के साथ एक्स्ट्रा फीस का प्रावधान भी है, जो इस तरह है:-
फोटो कॉपी किए गए हर पेज के लिए 2 रुपये।
बड़े आकार के कागज में कॉपी की लागत कीमत।
नमूनों या मॉडलों के लिए उसकी लागत या कीमत।
अगर दस्तावेज देखने हैं तो पहले घंटे के लिए कोई फीस नहीं है। इसके बाद हर घंटे के लिए फीस 5 रुपये है।
डिस्क या फ्लॉपी में सूचना लेनी है तो हर डिस्क या फ्लॉपी के लिए 50 रुपये।

जा सकते हैं केंद्रीय सूचना आयोग
आप सीधे केंद्रीय सूचना आयोग में शिकायत कर सकते हैं अगर
आप संबंधित पब्लिक अथॉरिटी में जन सूचना अधिकारी न होने की वजह से आरटीआई नहीं डाल सकते
केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी आपकी ऐप्लिकेशन को संबंधित केंद्रीय लोक (जन) सूचना अधिकारी या अपीलीय अधिकारी को भेजने से मना करता है
सूचना के अधिकार एक्ट के तहत सूचना पाने की आपकी रिक्वेस्ट को ठुकरा दिया जाता है
अधिनियम में तय समय सीमा के भीतर आपकी ऐप्लिकेशन का कोई जवाब नहीं दिया जाता है
फीस के रूप में एक ऐसी राशि की मांग की जाती है जिसे आप उचित नहीं मानते
लगता है कि अधूरी और बरगलाने वाली झूठी सूचना दी गई है

होगी कार्रवाई
अगर किसी शिकायत या अपील पर फैसला देते समय केंद्रीय सूचना आयोग का यह मत होता है कि केंद्रीय सूचना अधिकारी ने बिना किसी ठीक वजह के ऐप्लिकेशन को जमा करने में कोताही बरती या तय समय के भीतर सूचना नहीं दी या गलत भावना से ऐप्लिकेशन को रिजेक्ट किया या जान-बूझकर गलत व गुमराह करने वाली सूचना दी अथवा उस सूचना को नष्ट किया जिसे मांगा गया था तो आयोग उस सूचना अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। इसके अलावा राज्य अथवा केंद्रीय सूचना आयोग को अधिकार है कि वह उस अधिकारी पर 250 रुपये रोजाना या अधिकतम 25,000 रुपये तक का जुर्माना भी कर सकता है।

केंद्रीय सूचना आयोग को अपील करते समय यह जानकारी दी जानी जरूरी है :
अपील करने वाले का नाम और पता
उस अधिकारी का नाम और पता जिसके फैसले के खिलाफ अपील की गई है
उस आदेश की संख्या जिसके खिलाफ अपील की गई है (अगर कोई हो)
अपील करने की वजह और उससे जुड़े फैक्ट

मांगी गई राहत
साथ ही उन आदेशों या दस्तावेजों की सेल्फ अटेस्टेड कॉपियां भी होनी चाहिए जिसके खिलाफ अपील की गई है और उन दस्तावेजों की कॉपी भी जिनके बारे में उसने अपील में ब्यौरा दिया है

यहां नहीं लागू होता कानून
किसी भी खुफिया एजेंसी की ऐसी जानकारियां, जिनके सार्वजनिक होने से देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो, को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। निजी संस्थानों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन इन संस्थाओं की सरकार के पास उपलब्ध जानकारी को संबंधित सरकारी विभाग से प्राप्त किया जा सकता है। खुफिया एजेंसियों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन होने और इन संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी ली जा सकती है। अन्य देशों के साथ भारत के संबंध से जुड़े मामलों की जानकारी को भी इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

'ओ' ब्लड ग्रुप की महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी होती है


वैज्ञानिकों ने नए शोधों में पाया गया कि 'O' ब्लड ग्रुप की महिलाओं को गर्भधारण में परेशानी होती है। इसकी वजह उनके गर्भाशय में खराब गुणवत्ता के कम अंडे का बनना होता है। वहीं इसके विपरीत जिन महिलाओं का ब्लड ग्रुप 'A' होता है उनकी प्रजनन संभावनाएं बेहतर होती हैं। दरअसल वैज्ञानिकों ने विशेष ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं में प्रजनन क्षमता को अपनी शोध का विषय बनाया था।
शोधकर्ताओं ने पाया कि किसी महिला का एक विशेष ब्लड ग्रुप होने से यह उसकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है और उसके मां बनने के अवससरों को भी सीमित करता है।
शोध के दौरान याले यूनिवर्सिटी और न्यूयार्क के अल्बर्ट आइंसटाइन कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकताकर्ताओं ने गर्भधारण करने के लिए उपचार हासिल कर रही 560 महिलाओं का परीक्षण किया जिनकी औसत आयु 35 वर्ष थी।
शोधकर्ताओं ने प्रजनन क्षमता का मापदंड माने जाने वाले फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएचएच) का स्तर जांचने के लिए इन महिलाओं के रक्त के नमूने लिए। एफएसएच(FSH) का स्तर दस से अधिक होने से पता चलता है कि महिला को गर्भ धारण करने में दिक्कत होगी।
एफएसएच का उच्च स्तर इस बात का संकेतक है कि गर्भाश्य में अंडों की संख्या बेहद कम है और उपलब्ध अंडे भी अच्छी गुणवत्ता के नहीं हैं। शोध में यह भी पाया गया कि किसी अन्य ब्लड ग्रुप की महिलाओं के मुकाबले 'O' ब्लड ग्रुप की महिलाओं का एफएसएच(FSH) स्तर दस से अधिक होने की आशंका अधिक रहती है। ब्रिटिश मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटेन की 44 फीसदी आबादी का ब्लड ग्रुप ओ है।
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एडवड नेजात ने बताया कि प्रजनन उपचार हासिल कर रही दोनों रक्त समूहों की महिलाओं में से 'O' रक्त समूह की महिलाओं का एफएसएच(FSH) स्तर दस से अधिक होने की दोगुनी संभावना थी। उन्होंने बताया कि हमने पाया कि 'A' और 'एबी' निगेटिव समूह की महिलाएं गर्भ में अंडों की कम संख्या के प्रभाव से मुक्त थीं। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसायटी के अध्यक्ष टोनी रदरफोर्ड के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है, यह पहली बार है कि जब मुझे पता चला है कि शोधकर्ताओं ने प्रजनन क्षमता और रक्त समूह के बीच संबंध बताया है।

Monday, May 16, 2011

नेपाल में दिखते हैं हिमालय के खूबसूरत नजारे


नेपाल एशिया का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। पूरब में यह भूटान, उत्तर-पूर्व में तिब्बत, उत्तर में चीन, दक्षिण पूर्व और पश्चिम में भारत से घिरा है। नेपाल में हिमालय के सबसे खूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं जो दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। इस देश की खूबसूरती यहां की संस्कृति, सांस्कृतिक विरासत, वास्तुकला और साहसिक खेलों में भी दिखती है। कहा जाता है कि यहां की सभ्यता का विकास काठमांडो की पहाडिय़ों में हुआ था। वही इस देश की राजधानी है।
नेपाल के पहाड़ों की खूबसूरती इस देश की सबसे बड़ी संपदा है। दुनिया की दस ऊंची हिमालयी पर्वतमालाओं में से आठ सिर्फ नेपाल में हैं। यहां आप कई साहसिक खेलों से रूबरू हो सकते हैं। यह देश बड़े पैमाने पर ट्रैंकिंग, माउन्टेनियरिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, हाइकिंग, वाटर रैफ्टिंग आदि के लिए मशहूर है। नेपाल की पहाडिय़ों पर आप साहसिक खेलों का आनंद उठा सकते हैं। गर्मी की छुट्टियों में समय बिताने का बेहतरीन स्थान है नेपाल।
नेपाल में देखने लायक बहुत कुछ है। यहां पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है माउंट एवरेस्ट। यहां का न्याटापोला मंदिर, कृष्ण मंदिर और दरबार चौक भी देखने लायक है। नेपाल में कई तरह के संग्रहालय हैं। नेशनल म्यूजियम और नेशनल आर्ट गैलरी तो पर्यटकों को विशेष रूप से पसंद आती है।
नेपाल न सिर्फ साहसिक खेलों के लिए मशहूर है बल्कि आप यहां बेहतरीन वन्य जीव अभयारण्य भी देख सकते हैं। अगर आपको वन्यजीवों से प्यार है और उन्हें करीब से देखना चाहते हैं तो नेपाल की बेहतरीन वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी देख सकते हैं। यहां चितवन नेशनल पार्क, रारा नेशनल पार्क, सागरमठ नेशनल पार्क और मकालु बरुन नेशनल पार्क हैं। आप इन स्थानों पर वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में अठखेलियां करते देख सकते हैं।
यूं तो पूरा नेपाल ही बहुत खूबसूरत है लेकिन इसकी राजधानी काठमांडो का क्या कहना! यहां किसी भी मौसम में जा सकते हैं। भारत से दूरी बहुत कम होने का भी अपना लाभ है। यह शहर भारत के कई प्रमुख शहरों से सड़क और वायु मार्ग से जुड़ा है। काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी देखने लायक है।